
पंजाब में गेहूं की सरकारी ख़रीद का सीजन 1 अप्रैल से शुरू हो चुका है। इसी कड़ी में आज चौथे दिन एशिया की सबसे बड़ी अनाज मंडी खन्ना में गेहूं की पहली ढेरी पहुंची।
फतेहगढ़ साहिब जिले के गांव भड़ी के किसान परमिंदर सिंह अपनी फसल लेकर मंडी पहुंचे। उन्होंने करीब 3 एकड़ में गेहूं की कटाई कर फसल मंडी में लाई है।
फसल की गुणवत्ता बेहतर, मौसम का असर नहीं
किसान परमिंदर सिंह ने बताया कि यह अगैती फसल है और इसकी गुणवत्ता काफी अच्छी है। झाड़ भी ठीक-ठाक आया है और इस बार मौसम का कोई खास असर फसल पर देखने को नहीं मिला।
उन्होंने यह भी मांग की कि मेहनत और बढ़ती महंगाई को देखते हुए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाया जाना चाहिए।
आढ़तियों की हड़ताल से खरीद पर अनिश्चितता
दूसरी ओर, आढ़तियों की हड़ताल के चलते मंडी में आई फसल की बोली पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जब तक हड़ताल खत्म नहीं होती, तब तक फसल की खरीद शुरू होना मुश्किल है।
इस स्थिति में फसल की देखभाल की जिम्मेदारी आढ़तियों पर आ जाती है, जिससे किसान और आढ़ती दोनों परेशान हैं।
आढ़ती की प्रतिक्रिया
आढ़ती राज कुमार राजू ने बताया कि मंडी में फसल आने के बाद उसकी देखभाल करना आढ़ती की जिम्मेदारी होती है। वे पंखा लगाकर फसल की सफाई और रखरखाव कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अगर समय पर बोली नहीं लगती, तो फसल खराब होने का खतरा बना रहेगा।
मार्केट कमेटी की तैयारी
मार्केट कमेटी खन्ना के सचिव कमलदीप सिंह मान ने बताया कि संबंधित खरीद एजेंसियों के प्रतिनिधि फसल के मानकों की जांच करेंगे।
उनके अनुसार:
- गेहूं में 13% नमी होना जरूरी है
- मानक पूरे होने के बाद ही बोली लगाई जाएगी
- इस बार गेहूं का भाव ₹2585 प्रति क्विंटल तय किया गया है
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे सूखी फसल ही मंडी में लाएं, ताकि किसी को परेशानी न हो।
