मंत्री सौंध का आरोप – कांग्रेस ने झूठे केस में फंसाया, कोटली बोले – गंदी राजनीति कर रहे सौंध

पंजाब की राजनीति एक बार फिर उस समय गरमा गई जब साल 2019 के बहुचर्चित करोड़ों रुपये के हवाला मामले में फंसे पुलिस कर्मचारी दिलबाग सिंह बबली को करीब सात साल बाद दोबारा बहाल कर दिया गया। इस बहाली ने न केवल पुराने मामले को फिर से जिंदा कर दिया है, बल्कि राजनीतिक दलों के बीच तीखी बयानबाजी को भी जन्म दे दिया है। एक तरफ मौजूदा सरकार इसे “सच्चाई की जीत” बता रही है, वहीं विपक्ष इसे गंदी राजनीति करार दे रहा है।
दिलबाग सिंह बबली की बहाली के बाद खन्ना से विधायक और कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंध ने सोशल मीडिया के जरिए बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान बबली को झूठे केस में फंसाया गया था और उसे सालों तक न्याय नहीं मिला। सौंध ने लिखा कि 2022 में विधायक बनने के बाद जब यह मामला उनके संज्ञान में आया, तो उन्होंने खुद मुख्यमंत्री भगवंत मान से बबली की मुलाकात करवाई और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कई बैठकें कीं। इसके बाद जांच में बबली को बेगुनाह पाया गया और उसे दोबारा नौकरी में बहाल किया गया।
सौंध ने अपने बयान में यह भी आरोप लगाया कि उस समय खन्ना के कांग्रेस विधायक के दबाव में बबली को फंसाया गया था। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने एक निर्दोष को इंसाफ दिलाया है और यह साबित कर दिया कि सच कभी हारता नहीं।
वहीं दूसरी ओर, पूर्व मंत्री और उस समय के विधायक गुरकीरत सिंह कोटली ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि तरुणप्रीत सिंह सौंद गंदी राजनीति कर रहे हैं और निजी लाभ के लिए बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। कोटली ने स्पष्ट किया कि इस मामले से उनका या कांग्रेस पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने दावा किया कि उल्टा उन्होंने उस समय दिलबाग सिंह बबली की मदद की थी।
कोटली ने कहा कि यह कोई जनहित का मुद्दा नहीं, बल्कि एक निजी मामला है, जिसे जानबूझकर राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे मामलों को उछाल रही है और कांग्रेस को बदनाम करने की कोशिश कर रही है।
क्या था पूरा मामला?
