आम आदमी पार्टी (AAP) ने राज्यसभा में अपने उपनेता पद से राघव चड्ढा को हटा दिया है। उनकी जगह अब पंजाब से सांसद अशोक मित्तल को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी के इस फैसले ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है और AAP के भीतर चल रहे मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।
पार्टी का बड़ा फैसला, पहले से थे संकेत
गुरुवार को AAP ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर स्पष्ट कर दिया कि अब राघव चड्ढा पार्टी की ओर से नहीं बोलेंगे। इस कदम के बाद यह साफ हो गया कि पार्टी और चड्ढा के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था। राजनीतिक चर्चाओं में पहले से ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि या तो पार्टी कार्रवाई करेगी या राघव चड्ढा कोई नई राह चुनेंगे।
यूथ आइकन से ‘विलेन’ तक का सफर
राघव चड्ढा कभी AAP के सबसे चमकते सितारों में गिने जाते थे। उन्हें पार्टी का भविष्य माना जाता था और वे अरविंद केजरीवाल के करीबी नेताओं में शामिल थे। लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि पार्टी ने न सिर्फ उन्हें पद से हटाया, बल्कि उनके बोलने के समय पर भी रोक लगा दी है।
बदला हुआ स्टैंड बना विवाद की वजह
पिछले कुछ समय में राघव चड्ढा के रुख में बड़ा बदलाव देखा गया। पहले वे पार्टी के मुद्दों पर खुलकर बोलते थे, लेकिन हाल ही में उन्होंने आम जनता से जुड़े मुद्दों को संसद में प्रमुखता से उठाना शुरू किया। उन्होंने जिन मुद्दों को उठाया, उनमें शामिल हैं: मोबाइल डेटा एक्सपायरी और रोलओवर की समस्या एयरपोर्ट पर महंगे खाने-पीने और बैगेज चार्ज गिग वर्कर्स (Zomato, Swiggy, Blinkit) की कम मजदूरी 10 मिनट डिलीवरी का दबाव और सामाजिक सुरक्षा पितृत्व अवकाश (Paternity Leave) फ्लाइट देरी, पेपर लीक और टोल प्लाजा से जुड़ी शिकायतें इन मुद्दों को जनता का बड़ा समर्थन मिला और उनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुए।
पार्टी क्यों हुई नाराज?
AAP का आरोप है कि राघव चड्ढा पार्टी लाइन से हटकर काम कर रहे थे। वे न तो भाजपा और न ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर खुलकर हमला कर रहे थे। वहीं, पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि उनकी “चुप्पी” खास तौर पर उन मुद्दों पर भारी पड़ी, जो सीधे अरविंद केजरीवाल से जुड़े थे।
अंदरूनी कलह आया सामने
राघव चड्ढा पर की गई यह कार्रवाई सिर्फ एक संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर चल रही खींचतान का संकेत है। यह मामला बताता है कि कैसे राजनीति में समीकरण तेजी से बदलते हैं—कल तक जो नेता पार्टी का चेहरा था, आज वही सवालों के घेरे में है।
आगे क्या?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि राघव चड्ढा आगे क्या कदम उठाएंगे—क्या वे पार्टी में बने रहेंगे या अपनी अलग राजनीतिक राह चुनेंगे? फिलहाल, यह प्रकरण AAP की आंतरिक राजनीति और नेतृत्व शैली पर कई सवाल खड़े कर रहा है।