
खन्ना भाजपा में कलह तेज | अमित भाटिया का चीमा पर बड़ा आरोप
खन्ना भाजपा में अंदरूनी विवाद बढ़ा। मंडल प्रधान अमित भाटिया ने जिला प्रधान भूपिंदर सिंह चीमा पर गंभीर आरोप लगाए और पार्टी की स्थिति पर सवाल उठाए।
खन्ना:
खन्ना में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर अंदरूनी कलह लगातार बढ़ती जा रही है। पार्टी की आंतरिक फूट अब खुलकर सामने आ गई है और सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन चुकी है।
हाल ही में पार्टी के नए कार्यालय के उद्घाटन समारोह के दौरान यह विवाद और स्पष्ट हो गया, जब कई वरिष्ठ नेता कार्यक्रम से नदारद रहे। इससे पार्टी की एकजुटता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
उद्घाटन समारोह में कम मौजूदगी पर उठे सवाल
भाजपा मंडल खन्ना-1 के प्रधान अमित भाटिया ने इस कार्यक्रम का बहिष्कार किया था। उन्होंने जिला प्रधान भूपिंदर सिंह चीमा पर पार्टी को “प्राइवेट लिमिटेड कंपनी” की तरह चलाने का आरोप लगाया।
भाटिया ने कहा कि उद्घाटन समारोह में खन्ना से 32 लोग भी नहीं पहुंचे, जबकि दावा किया गया था कि हर वार्ड से 4-4 उम्मीदवार तैयार हैं।
अमित भाटिया का बड़ा बयान
अपने फेसबुक पोस्ट में अमित भाटिया ने तीखा हमला बोलते हुए कहा:
- “1980 से अब तक भाजपा का इतना खराब दौर नहीं आया।”
- “जिला प्रधान का अहंकारी रवैया पार्टी को नुकसान पहुंचा रहा है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि भूपिंदर सिंह चीमा किसी को साथ लेकर नहीं चलते, जिससे संगठन कमजोर हो रहा है।
132 उम्मीदवारों पर उठाए सवाल
भाटिया ने जिला प्रधान के उस दावे पर सवाल उठाया, जिसमें कहा गया था कि हर वार्ड में 4 उम्मीदवार हैं।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा:
“132 उम्मीदवारों की बात सुनते-सुनते 32 हफ्ते हो गए, लेकिन आज तक पता नहीं चला कि ये लोग हैं कहां।”
उन्होंने मजाकिया अंदाज में यह भी कहा कि वे इन उम्मीदवारों को ढूंढने के लिए “शिमला” तक चले गए।
जिला प्रधान भूपिंदर सिंह चीमा की प्रतिक्रिया
इस मामले में जब जिला प्रधान भूपिंदर सिंह चीमा से बात की गई, तो उन्होंने कहा:
- पार्टी का अनुशासन बनाए रखना जरूरी है
- अगर किसी को शिकायत है, तो वह हाईकमान से संपर्क करे
- सोशल मीडिया पर इस तरह की बयानबाजी सही नहीं है
उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी हाईकमान पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और जल्द कार्रवाई हो सकती है।
चुनाव से पहले बढ़ी चिंता
नगर कौंसिल चुनाव से पहले भाजपा में इस तरह की अंदरूनी खींचतान पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर जल्द ही विवाद को नहीं सुलझाया गया, तो इसका असर चुनावी प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
