
पंजाब में गेहूं की सरकारी खरीद सीजन 1 अप्रैल से शुरू होने जा रहा है, लेकिन इससे पहले ही राज्यभर के आढ़तियों ने हड़ताल पर जाने का ऐलान कर दिया है। इस फैसले से पूरे राज्य में फसल खरीद प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
एशिया की सबसे बड़ी अनाज मंडियों में शामिल खन्ना मंडी में भी आढ़तियों ने फसल खरीद का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। इसके चलते न केवल गेहूं, बल्कि जौ और सरसों जैसी अन्य फसलों की खरीद भी प्रभावित हो सकती है।
ढाई प्रतिशत आढ़त की मांग को लेकर विरोध
आढ़ती एसोसिएशन खन्ना के प्रधान हरबंस सिंह रोशा ने बताया कि आढ़तियों की ढाई प्रतिशत कमीशन की मांग लंबे समय से केंद्र सरकार के पास लंबित है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा आढ़तियों के साथ अन्याय किया जा रहा है, जिसके विरोध में हड़ताल का फैसला लिया गया है।
उन्होंने बताया कि हाल ही में पंजाब भर के आढ़तियों की बैठक में सर्वसम्मति से 1 अप्रैल से हड़ताल शुरू करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि एफसीआई द्वारा कमीशन 46 रुपये से बढ़ाकर 50.75 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है, जो अपेक्षाओं के मुकाबले बहुत कम है।
हरियाणा मॉडल लागू करने की मांग
आढ़तियों ने मांग की है कि हरियाणा की तर्ज पर पंजाब सरकार भी आढ़त बढ़ाकर कम से कम 55 रुपये प्रति क्विंटल करे। उन्होंने साफ किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
सरकार ने किए खरीद के पूरे इंतजाम
दूसरी ओर, मार्केट कमेटी खन्ना के सचिव कमलदीप सिंह मान ने बताया कि मंडियों में गेहूं की आवक को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष खन्ना मंडी में लगभग 10.14 लाख क्विंटल गेहूं की आवक हुई थी और इस साल भी 10 लाख क्विंटल से अधिक आवक की उम्मीद है।
उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि मंडियों में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी जाएगी और सरकार की ओर से सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
निष्कर्ष
आढ़तियों की हड़ताल के ऐलान से पंजाब में गेहूं खरीद सीजन की शुरुआत पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो इसका सीधा असर किसानों और कृषि व्यवस्था पर पड़ सकता है।
