
पंजाब में एक बार फिर ईंटों के दाम बढ़ा दिए गए हैं, जिससे निर्माण कार्यों और आम लोगों पर सीधा असर पड़ने वाला है। खन्ना में लुधियाना जिला और फतेहगढ़ साहिब जिला के भट्ठा मालिकों की बैठक के बाद सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया कि अब ईंटें 8800 रुपये प्रति हजार के हिसाब से बेची जाएंगी।
कोयले की महंगाई बनी मुख्य वजह
भट्ठा मालिकों के अनुसार, ईंटों की कीमत बढ़ाने के पीछे सबसे बड़ा कारण कोयले की लगातार बढ़ती कीमतें हैं। पहले जो कोयला 10,500 से 11,500 रुपये प्रति टन मिलता था, अब वह बढ़कर 20 हजार रुपये प्रति टन से भी ऊपर पहुंच गया है। इससे उत्पादन लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है।
उद्योग पर गहराता संकट
भट्ठा मालिक एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि उद्योग इस समय गंभीर संकट से गुजर रहा है।
- करीब 50% भट्ठे पहले ही बंद हो चुके हैं
- जो भट्ठे चल रहे हैं, वे भी घाटे में हैं
- छोटे कारोबारियों पर लागत का दबाव लगातार बढ़ रहा है
भट्ठा मालिकों ने आरोप लगाया कि बड़े कॉरपोरेट घराने अपनी मनमर्जी से कीमतें तय कर रहे हैं, जिससे छोटे उद्योग प्रभावित हो रहे हैं।
जीएसटी और नीतियों का भी असर
उद्योग पर बढ़ते दबाव के पीछे अन्य कारण भी सामने आए हैं:
- जीएसटी दर 5% से बढ़ाकर 18% कर दी गई
- भट्ठों में 20–50% तक पराली इस्तेमाल करने के निर्देश
- उत्पादन और गुणवत्ता पर असर की आशंका
- भट्ठा चलाने के लिए करीब 22 तरह की मंजूरियां जरूरी
लंबे समय तक बंद रह सकते हैं भट्ठे
इन समस्याओं के चलते कई भट्ठा मालिकों ने अपने भट्ठे लंबे समय के लिए बंद करने का फैसला किया है। जानकारी के अनुसार, जून से लेकर दिसंबर या जनवरी तक यानी करीब 7 महीने तक भट्ठे बंद रह सकते हैं।
आम लोगों और मजदूरों पर असर
ईंटों की कीमतों में हाल ही में 500 से 800 रुपये प्रति हजार तक की बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा असर:
- घर बनाने वाले लोगों पर
- रियल एस्टेट सेक्टर पर
- निर्माण कार्यों की लागत पर
वहीं, भट्ठे बंद होने से हजारों मजदूरों की रोजी-रोटी पर भी संकट खड़ा हो गया है।
सरकार से राहत की मांग
भट्ठा मालिकों ने सरकार से मांग की है कि कोयले की कीमतों पर नियंत्रण किया जाए और नीतियों में राहत दी जाए। उनका कहना है कि यदि जल्द कदम नहीं उठाए गए, तो यह उद्योग और गहरे संकट में जा सकता है और निर्माण कार्य बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं।
