
पंजाब के खन्ना में पुलिस ने एक बड़े फर्जी मेडिकल और डोप टेस्ट रैकेट का पर्दाफाश किया है। हैरानी की बात यह है कि इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड महज 23 साल का बीबीए ड्रॉपआउट मंचित कुमार है, जो कम समय में अमीर बनने की चाहत में अपराध की दुनिया में उतर गया।
मंचित कुमार की कहानी एक आम युवक की तरह शुरू हुई, लेकिन उसकी सोच अलग थी। उसे मेहनत से ज्यादा शॉर्टकट अपनाने में विश्वास था। लग्जरी लाइफस्टाइल, महंगी गाड़ियां और ब्रांडेड कपड़ों की चाहत ने उसे गलत रास्ते पर धकेल दिया। शुरुआत में उसने क्रिप्टोकरेंसी में निवेश किया, लेकिन अपेक्षित मुनाफा न मिलने पर उसने अवैध गतिविधियों का रास्ता चुना।
कोविड-19 महामारी के दौरान मंचित ने खन्ना के सिविल अस्पताल में प्राइवेट तौर पर काम करना शुरू किया। इस दौरान उसने अस्पताल की कार्यप्रणाली, दस्तावेज़ तैयार करने के तरीके, डॉक्टरों की मोहर और हस्ताक्षर प्रणाली को गहराई से समझ लिया। यही जानकारी बाद में उसके फर्जीवाड़े की नींव बनी।
इसके बाद मंचित ने नेटवर्क खड़ा किया। दोनों ने फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट, नकली डोप टेस्ट रिपोर्ट और जाली दस्तावेज तैयार करने का धंधा शुरू किया। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल खासतौर पर असला लाइसेंस, सरकारी नौकरियों और अदालतों में पेशी के लिए किया जाता था।
आरोपियों की चालाकी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके बनाए दस्तावेज असली से अलग पहचानना बेहद मुश्किल था। वे लोगों से मोटी रकम लेकर “गारंटी” के साथ फर्जी सर्टिफिकेट उपलब्ध कराते थे। धीरे-धीरे उनका नेटवर्क फैलता गया और कई लोग इसका शिकार बनते गए।
इस अवैध कारोबार को छिपाने के लिए उन्होंने सिविल अस्पतालों की पार्किंग और साइकिल स्टैंड का ठेका ले रखा था। बाहर से यह सामान्य व्यवसाय लगता था, लेकिन अंदर ही अंदर फर्जीवाड़े का बड़ा खेल चल रहा था।
पुलिस को इस रैकेट की भनक लगने के बाद गुप्त जांच शुरू की गई। तकनीकी और मानव स्रोतों की मदद से आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखी गई। पर्याप्त सबूत मिलने के बाद पुलिस ने सुनियोजित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने बड़ी मात्रा में फर्जी सामग्री बरामद की, जिसमें रिटायर्ड और मौजूदा एसएमओ सहित कई डॉक्टरों की नकली मोहरें, डोप टेस्ट की सील, ओपीडी स्लिप, आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हैं।
गिरफ्तार आरोपियों में मंचित कुमार (निवासी खन्ना) और रमेश कुमार (निवासी लुधियाना) शामिल हैं।
यह कार्रवाई डीआईजी लुधियाना रेंज के निर्देशों और एसएसपी खन्ना डॉ. दर्पण आहलूवालिया के नेतृत्व में चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत की गई। पुलिस टीम में एसपी (आई) पवनजीत चौधरी, डीएसपी (आई) मोहित सिंगला, डीएसपी (एच) प्रितपाल सिंह संधू और स्पेशल ब्रांच इंचार्ज जरनैल सिंह रंधावा की अहम भूमिका रही।
पुलिस ने बताया कि मामले की आगे जांच जारी है और इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है।
