राज्यभर में बनाए गए 1897 खरीद केंद्र खन्ना में आढ़तियों में आपसी फूट सामने आई, दो ग्रुप अलग अलग राह पर चले
पंजाब में गेहूं की सरकारी खरीद का सीजन 1 अप्रैल 2026 से शुरू हो गया है, लेकिन पहले ही दिन आढ़तियों की हड़ताल ने मंडियों के माहौल को प्रभावित कर दिया। राज्य सरकार ने 1897 खरीद केंद्रों के जरिए करीब 122 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा है। किसानों को 24 से 48 घंटे के भीतर भुगतान देने का भरोसा भी दिया गया है। इसके साथ ही बारदाना और उठान (लिफ्टिंग) की पूरी व्यवस्था होने का दावा किया गया है। हालांकि दूसरी ओर आढ़तियों की हड़ताल के कारण कई मंडियों में खरीद प्रक्रिया प्रभावित होने के संकेत मिल रहे हैं। खासकर एशिया की सबसे बड़ी अनाज मंडी खन्ना में इसका असर साफ दिखाई दे रहा है, जहां मंडी पूरी तरह बंद होने के दावे किए जा रहे हैं।
इसी बीच आढ़ती संगठनों में भी फूट की स्थिति बन गई है। एक तरफ फेडरेशन ऑफ आढ़ती एसोसिएशन पंजाब ने 1 अप्रैल से हड़ताल का ऐलान किया है। खन्ना के प्रधान हरबंस सिंह रोशा ने दावा किया कि हड़ताल पूरी तरह सफल है और जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मानती, तब तक गेहूं की खरीद नहीं होगी। “हमारी मांगें लंबे समय से लंबित हैं। सरकार जब तक ठोस समाधान नहीं करती, हड़ताल जारी रहेगी और खरीद नहीं की जाएगी।
”वहीं दूसरी ओर आढ़ती एसोसिएशन पंजाब ने इस हड़ताल से खुद को अलग कर लिया है। संगठन के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अविनाशप्रीत सिंह जल्ला ने फेडरेशन के इस फैसले को “राजनीतिक ड्रामा” करार दिया। उन्होंने कहा कि यह कदम जानबूझकर पंजाब सरकार को बदनाम करने के लिए उठाया गया है।जल्ला ने बताया कि सरकार पहले से ही आढ़तियों की मांगों को लेकर गंभीर है और लगातार बातचीत जारी है। उन्होंने कहा कि गेहूं सीजन की शुरुआत में हड़ताल करना ठीक नहीं है, क्योंकि इससे किसानों को नुकसान हो सकता है। “हमारा संगठन हड़ताल में शामिल नहीं है। मंडियों में खरीद जारी रहेगी और किसानों को किसी तरह की परेशानी नहीं आने दी जाएगी।”इसी तरह खन्ना मंडी के एक अन्य आढ़ती और संगठन के राज्य वित्त सचिव रणजीत सिंह औजला ने भी साफ किया कि वे हड़ताल के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के साथ बातचीत जारी है और जल्द ही मुख्यमंत्री के साथ बैठक हो सकती है। “हमारी कोई हड़ताल नहीं है। बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाएगा और खरीद प्रक्रिया जारी रहेगी।”इस पूरी स्थिति के कारण मंडियों में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। एक तरफ सरकार बड़े स्तर पर खरीद के दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ आढ़तियों की आंतरिक फूट और हड़ताल के कारण जमीनी स्तर पर हालात पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं।खास तौर पर भंडारण (स्टोरेज) की समस्या भी सामने आ रही है, क्योंकि पिछले साल का अनाज अभी तक गोदामों में पड़ा है। इसी कारण FCI को सीधे डिलीवरी देने की मांग भी उठ रही है।कुल मिलाकर गेहूं सीजन की शुरुआत उम्मीदों और चुनौतियों दोनों के साथ हुई है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार और आढ़ती संगठनों के बीच सहमति बनती है या नहीं, क्योंकि इसका सीधा असर किसानों और मंडियों के कामकाज पर पड़ेगा।
